Who is the GOD...?
जो बिना किसी स्वार्थ और सौदे की हमारे हर जरूरतें पूरी करता है ! हमारी जन्म से लेकर, खुद की अंत तक, हमारी परवरिश करता हे, जीने के लिए जरुरत हर बौ चीज़, खुद पाये या न पाया, पर हमें देता रहे, हम सब को पता हे बो लोग कॉन हे.....!
चलो बात करते हे "भारत" सरकार का कानून के हिसाब के अनुशार, अगर कोई लड़का 18 शाल के बाद, अपने मनन मुताबिक़ किसीवि कारन से, अपने जन्म दाता को छोड़ देता है तो, इसमें हमारे देश की कानून और संबिधान कुछ वि नहीं कर सकता, ऊपर से "बृद्धाश्रम" खोल रखा है, देश की हर कोने पे जन्मा दाताओ के लिए ! जॉब वो लोग बूढ़े हो जायेंगे तब !
मुझे एक बात समझ में नहीं आता की, अगर हमारे "पिता" "माता" हमारे लिए पुरी जिंदगी कुर्बान कर देते हे तो,तो, क्या उनका इतना वि हक नही बनता की उनके बुढ़ापे में अपने औलादो से थोड़ी सी सहारा की आशा करे !
- पर किसीने उस "गॉड" को देखहे...?
और कोई बोलेगा "पुराण", "सस्त्र", "बिबेल" और "कुरान" की पूरी ज्ञानत हे, जहाँ पे "गॉड" होनेका पूरा प्रमाण हे !
- "गॉड" हे, हम मानते हे !
दिनà, रात, धुप, बरसात, अंधी, तूफ़ान, मौशुम, हवा, खाना, पानी, ज्ञान, दवा, जीवन और मृत्यु ! ये सुब हे जिन्दगी का कारन ! हम उसे ही "गॉड" मानते हे, चाहे उसका नाम कुछ वि हो !
ये ज़िन्दगी बहत ही बिचित्र हे ! जैसे कि हमारा पहला काम जिन्दा रेहना और जिन्दा रेहने केलिए जो सामग्री चाहिए उसको कैसे वि हासिल करना ! वार्ना भूक, लाज और फुटपात में पड़े हुए ये जान कवी वि निकल जायेगा ! क्यों की जिन्दा रहने के लिए ये 3 चीज़ बहत ही जरूरी हे "रोटी","कपडा" और "मकान" !
- हमारी जान कैसे और कहाँ से उत्पारं होती हे....?
दो आत्मा और दो सरीर से उत्पारं होती हे अरबो सुक्राणु ! और उन अरबों शुक्राणु में से एक ही शुक्राणु चयन किया जाता है और उसे उन दो सरीर में से जो स्त्री लिंग होता है उस के शरीर में पालः दिया जाता है ! ये कुन कर रहा हे, कैसे कर रहा हे, कुछ वि नहीं पता, बस होता चला आ रहा हे !



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